Pauranik Katha

आलसी मत बनें

जीवन में सफलता हासिल करना चाहते है तो आलस्य को अपने पास आने न दें। आलसी की तुलना उस तालाब से की जा सकती है सीमा में बंध जाने की वजह से जिसके पानी में सरांध व काई जम जाती है। जबकि अनवरत चलने वाली नदी का पानी सदैव निर्मल रहता है। यदि आप दिनभर …

आलसी मत बनें Read More »

चार मूर्ख

एक बार काशी नरेश ने अपने मंत्री को यह आदेश दिया कि जाओ और तीन दिन के भीतर चार मूर्खों को मेरे सामने पेश करो। यदि तुम ऐसा नहीं कर सके तो तुम्हारा सिर कलम कर दिया जाएगा। पहले तो मंत्री जी थोड़े से घबराये लेकिन मरता क्या न करता। राजा का हुक्म जो था। …

चार मूर्ख Read More »

सबसे बड़ा दाता

राजपुर नगर में दो व्यक्ति शामू और झामु रहते थे। दोनों ही थोड़े आलसी थे और भाग्य पर विश्वास करते थे। शामू कहता – यदि राजा विक्रम सिंह मुझे कुछ देता है तो गुजारा हो जाता है अन्यथा मेरे पास कुछ भी नहीं है। झामु कहता – भगवान भोलेनाथ मुझे कुछ देते हैं तो मेरा …

सबसे बड़ा दाता Read More »

नकल में भी अकल चाहिए

एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक बाज रहता था। पहाड़ की तराई में बरगद के पेड़ पर एक कौआ अपना घोंसला बनाकर रहता था। वह बड़ा चालाक और धूर्त था। उसकी कोशिश सदा यही रहती थी कि बिना मेहनत किए खाने को मिल जाए। पेड़ के आसपास खोह में खरगोश रहते थे। जब भी …

नकल में भी अकल चाहिए Read More »

मक्खीचूस गीदड़

जंगल में एक गीदड़ रहता था। वह बड़ा कंजूस था। वह कंजूसी अपने शिकार को खाने में किया करता था। जितने शिकार से दूसरा गीदड़ दो दिन काम चलाता, वह उतने ही शिकार को सात दिन तक खींचता। जैसे उसने एक खरगोश का शिकार किया। पहले दिन वह एक ही कान खाता। बाकी बचाकर रखता। …

मक्खीचूस गीदड़ Read More »

तपस्विनी बिल्ली

एक वन में एक पेड़ की खोह में एक चकोर रहता था। उसी पेड़ के आस-पास कई पेड़ और थे, जिन पर फल व बीज उगते थे। उन फलों और बीजों से पेट भरकर चकोर मस्त पड़ा रहता। इसी प्रकार कई वर्ष बीत गए। एक दिन उड़ते-उड़ते एक और चकोर सांस लेने के लिए उस …

तपस्विनी बिल्ली Read More »

सियार की बुद्धिमानी

एक समय की बात हैं कि जंगल में एक शेर के पैर में कांटा चुभ गया। पंजे में जख्म हो गया और शेर के लिए दौड़ना असंभव हो गया। वह लंगड़ाकर मुश्किल से चलता। शेर के लिए तो शिकार करने के लिए दौड़ना जरूरी होता है। इसलिए वह कई दिन कोई शिकार न कर पाया …

सियार की बुद्धिमानी Read More »

परिश्रम ही धन है

सुन्दरपुर गावं में एक किशन रहेता था । उसके चार बेटे थे । वे सभी आलसी और निक्कमे थे । जब किशन बुढा हुआ तो उसे बेटो की चिंता सताने लगी । एक बार किशान बहोत बीमार पड़ा । मृत्यु निकट देखकर उसने चार बेटो को अपने पास बुलाया । उसने उस चारो को कहा …

परिश्रम ही धन है Read More »

ईमानदारी का फल

गोपाल एक गरीब लकडहारा था । वह रोज जंगल में जाकर लकडिया काटता था और शाम को उन्हें बाजार में बेच देता था । लकड़ियों को बेचने से जो पैसे मिलते उन्ही से उसके परिवार का गुजर-बसर होता था । एक दिन गोपाल जंगल में दूर तक निकल गया । वहाँ उसकी द्रष्टि नदी के …

ईमानदारी का फल Read More »

प्रसन्न रहने की कला

प्राचीनकाल में एक संत थे । धर्मश्रधा के कारण सदा प्रसन्न रहते, चहेरे से उल्लास टपकता रहता । चोरों ने समझा उनके पास कोई बड़ी दौलत है, अन्यथा हर घडी इतने प्रसन्न रहने का और क्या कारण हो सकता है ? अवसर पाकर चोंरो ने उनका अपहरण कर लिया, जंगल में ले गए और बोले …

प्रसन्न रहने की कला Read More »