यजुर्वेद उन्नति
देवो वः सविता प्रार्पयतु श्रेष्ठमाय कर्मण। सबको उत्पन्न करने वाला देव, तुम सबको श्रेष्ठतम कर्म को प्रेरित करे। यहां यह प्रेरणा मिलती है कि सबको मिलजुल कर श्रेष्ठतम कर्मों को करना चाहिए, तभी उन्नति संभव है। प्रत्येक मनुष्य की यह महत्वांकांक्षा होनी चाहिए कि वह ऐसे कार्य करें जो उन्नतिकारक एवं प्रशंसनीय हों। ऐसे कर्म …
